चाइनीज मांझे से पतंग उड़ाने पर नाबालिग के अभिभावक भी हो सकते हैं जिम्मेदार: मध्य प्रदेश हाइकोर्ट

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मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और उपयोग से जुड़े एक स्वतः संज्ञान जनहित मामले की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की। हाइकोर्ट ने कहा कि यदि कोई नाबालिग चाइनीज नायलॉन मांझे से पतंग उड़ाते हुए पाया जाता है और उससे लापरवाही के कारण किसी की मृत्यु होती है, तो उस नाबालिग के अभिभावक को भी भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 106(1) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने सोमवार को सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिए।

अदालत ने कहा कि चाइनीज मांझे की बिक्री या उपयोग करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी लापरवाही से मृत्यु कारित करने के अपराध में कार्रवाई की जा सकती है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि नाबालिग इस प्रतिबंधित मांझे का उपयोग करता पाया जाता है, तो उसके अभिभावक की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

यह स्वतः संज्ञान जनहित याचिका 8 दिसंबर 2025 को चाइनीज मांझे की अवैध बिक्री और उसके कारण हो रही दुर्घटनाओं व मौतों को लेकर दर्ज की गई। इससे पहले 11 दिसंबर को हाइकोर्ट ने इस पर प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए।

सोमवार की सुनवाई में एमिकस क्यूरी के रूप में पेश हुए सीनियर एडवोकेट विवेक शरण ने अदालत को बताया कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझे का उपयोग और बिक्री जारी है। उन्होंने सभी जिलों से तत्काल एहतियाती कदमों और कार्ययोजनाओं की रिपोर्ट मंगाने तथा प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश देने का आग्रह किया।

राज्य की ओर से एडिशनल एडवोकेट जरनल राहुल सेठी ने अदालत को बताया कि चाइनीज मांझे की बिक्री और उपयोग रोकने के लिए कई निवारक कदम उठाए गए।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उज्जैन के पुलिस अधीक्षक द्वारा मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए एक सुरक्षा उपकरण विकसित किया गया, जिसे इंदौर पुलिस आयुक्तालय सहित आसपास के जिलों में प्रसारित किया जाएगा।

राज्य सरकार ने यह भी आश्वासन दिया कि प्रतिबंध और उससे जुड़े कानूनी परिणामों को लेकर स्थानीय अखबारों और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार किया जाएगा।

हाइकोर्ट ने निर्देश दिया कि यह स्पष्ट रूप से प्रचारित किया जाए कि चाइनीज मांझा बेचने या उपयोग करने वाले व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई की जा सकती है। साथ ही नाबालिग के मामले में उसके अभिभावक की जिम्मेदारी तय करने की बात भी जनता तक पहुंचाई जाए।

सुनवाई के दौरान मौजूद इंदौर कलेक्टर ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आवश्यक आदेश उसी दिन जारी कर दिए जाएंगे।

मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी, 2026 को होगी ।

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