
भिलाई । Pmohan ( mohan Media News)नगर निगम द्वारा लगाए जा रहे निर्यात कर के विरोध में शहर के उद्योग संचालक उतर गए हैं। भिलाई के प्रमुख औद्योगिक एवं व्यापारिक संगठनों ने संयुक्त रूप से भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति का गठन कर नगर निगम के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पत्रवार्ता में बताया कि इस समिति में स्टील चैंबर भिलाई, छत्तीसगढ़ वायर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, भिलाई वायर ड्राइंग संगठन, एंसिलरी संगठन, लघु उद्योग भारती, छत्तीसगढ़ चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज सहित समस्त लघु एवं मध्यम उद्योग शामिल हैं।
एउल्लेखनीय है कि भिलाई निगम प्रशासन ने अपने क्षेत्र में कुल 527 उद्योगों को निर्यात कर के दायरे में चिह्नित किया गया है। निगम का मानना है कि नियमानुसार प्रतिवर्ष निर्यात कर वसूली की जानी है। परन्तु ऐसा हो नहीं रहा है। निगम द्वारा अभियान के तहत पहले चरण में 193 उद्योगों से बकाया 42 करोड़ वसूलने नोटिस थमाना नवंबर में शुरू किया गया था। उद्योगों को छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत नोटिस भेजे गए थे। इनमें से 131 उद्योगों को धारा 173 के अंतर्गत प्रथम चरण का नोटिस दिया गया है, जबकि 62 उद्योगों को घारा 174 के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के बावजूद कर जमा न करने की स्थिति में अब निगम कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। पत्रवार्ता में उद्योग संचालक राहुल बंसल, संदीप अग्रवाल, अरविंदर खुराना ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद निर्यात कर जैस स्थानीय कर समाप्त किए गए थे। ऐसे में निर्यात पर लगर निगम कर लगाना केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीति का उल्लंघन है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है। समिति ने चेतावनी दी है कि सात आठ वर्षों का ओर उद्योग संचालक एकजुट होकर विरोध करने लगे हैं। संगठनों का कहना है कि नगर निगम वर्ष 2017 से बैंक डाटा के आधार पर सात से आठ वर्षों का निर्यात कर बकाया बताते हुए नोटिस जारी कर रहा है, जिसमें भारी पेनाल्टी भी जोड़ी गई है। यह प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही न्यायसंगत। बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई का अवसर दिए उद्योगों पर टैक्स थोपना एकमुश्त टैक्स और पेनाल्टी वसूली से अनेक इकाइयों के बंद होने का खतरा है, जिससे लगभग 40 हजार कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। संघर्ष समिति ने कर वसूली तत्काल रोकने, राज्यस्तरीय समान नीति बनाने, जीएसटी ढांचे के अनुरूप निर्णय लेने और उद्योग संगठनों से परामर्श के बाद ही कोई कदम उठाने की मांग की है । संगठनों का कहना है कि पूरे छत्तीसगढ़ में किसी अन्य नगर निगम में ऐसा कर लागू नहीं है, जिससे केवल भिलाई के उद्योगों पर भेदभावपूर्ण आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि निर्यात कर एक अप्रत्यक्ष कर है, जिसका भार अंततः ग्राहक पर पड़ता है। यदि पूर्व में इसकी जानकारी उल्लेखनीय है कि भिलाई निगम प्रशासन ने अपने क्षेत्र में कुल 527 उद्योगों को निर्यात कर के दायरे में चिह्नित किया गया है। निगम का मानना है कि नियमानुसार प्रतिवर्ष निर्यात कर वसूली की जानी है। परन्तु ऐसा हो नहीं रहा है। निगम द्वारा अभियान के तहत पहले चरण में 193 उद्योगों से बकाया 42 करोड़ वसूलने नोटिस थमाना नवंबर में शुरू किया गया था। उद्योगों को छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत नोटिस भेजे गए थे। इनमें से 131 उद्योगों को धारा 173 के अंतर्गत प्रथम चरण का नोटिस दिया गया है, जबकि 62 उद्योगों को घारा 174 के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के बावजूद कर जमा न करने की स्थिति में अब निगम कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं उद्योग संचालक संगठन के माध्यम इसके विरोध में अपना प्रयास जारी रखे हुए हैं ।
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भिलाई निर्यात कर संघर्ष समिति के सदस्यों ने पत्रवार्ता में दी जानकारी। नईदुनिया
अनेक इकाइयों के बंद होने का खतरा
उल्लेखनीय है कि भिलाई निगम प्रशासन ने अपने क्षेत्र में कुल 527 उद्योगों को निर्यात कर के दायरे में चिह्नित किया गया है। निगम का मानना है कि नियमानुसार प्रतिवर्ष निर्यात कर वसूली की जानी है। परन्तु ऐसा हो नहीं रहा है। निगम द्वारा अभियान के तहत पहले चरण में 193 उद्योगों से बकाया 42 करोड़ वसूलने नोटिस थमाना नवंबर में शुरू किया गया था। उद्योगों को छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम के तहत नोटिस भेजे गए थे। इनमें से 131 उद्योगों को धारा 173 के अंतर्गत प्रथम चरण का नोटिस दिया गया है, जबकि 62 उद्योगों को घारा 174 के तहत नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के बावजूद कर जमा न करने की स्थिति में अब निगम कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं दूसरी
शनिवार को समिति की ओर से पत्रवार्ता में उद्योग संचालक राहुल बंसल, संदीप अग्रवाल, अरविंदर खुराना ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद निर्यात कर जैस स्थानीय कर समाप्त किए गए थे। ऐसे में निर्यात पर लगर निगम कर लगाना केंद्र सरकार की निर्यात प्रोत्साहन नीति का उल्लंघन है, जिससे उद्योगों की लागत बढ़ रही है। समिति ने चेतावनी दी है कि सात आठ वर्षों काओर उद्योग संचालक एकजुट होकर विरोध करने लगे हैं। संगठनों का कहना है कि नगर निगम वर्ष 2017 से बैंक डाटा के आधार पर सात से आठ वर्षों का निर्यात कर बकाया बताते हुए नोटिस जारी कर रहा है, जिसमें भारी पेनाल्टी भी जोड़ी गई है। यह प्रक्रिया न तो पारदर्शी है और न ही न्यायसंगत। बिना किसी पूर्व सूचना और सुनवाई का अवसर दिए उद्योगों पर टैक्स थोपनाएकमुश्त टैक्स और पेनाल्टी वसूली से अनेक इकाइयों के बंद होने का खतरा है, जिससे लगभग 40 हजार कर्मचारियों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। संघर्ष समिति ने कर वसूली तत्काल रोकने, राज्यस्तरीय समान नीति बनाने, जीएसटी ढांचे के अनुरूपे निर्णय लेने और उद्योग संगठनों से परामर्श के बाद ही कोई कदम उठाने की मांग की हैनियमों के विरुद्ध है। संगठनों का कहना है कि पूरे छत्तीसगढ़ में किसी अन्य नगर निगम में ऐसा कर लागू नहीं है, जिससे केवल भिलाई के उद्योगों पर भेदभावपूर्ण आर्थिक बोझ डाला जा रहा है।संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि निर्यात कर एक अप्रत्यक्ष कर है, जिसका भार अंततः ग्राहक पर पड़ता है। यदि पूर्व में इसकी जानकारी
