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India-AI Summit: सख्त कानून से क्रिएट इन इंडिया मिशन तक, केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने बताई एआई पर सरकार की तैयारी

सार

सरकार ने साफ किया है कि एआई को खुली छूट नहीं मिलेगी। तकनीक के साथ सख्त कानूनी और तकनीकी सुरक्षा ढांचा बनेगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि क्रिएटर्स, कॉपीराइट, बच्चों की सुरक्षा और सामाजिक भरोसा सर्वोपरि है। इसके साथ ही उन्होंने क्रिएट इन इंडिया पर भी अपनी बात कही। आइए, जानते हैं इस समिट में वैष्णव ने क्या-कुछ कहा।

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अश्विनी वैष्णव, केंद्रीय मंत्री – फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को लेकर साफ संकेत दिया है कि देश तेज तकनीकी अपनाने के साथ मजबूत कानूनी और तकनीकी सुरक्षा ढांचा भी बनाएगा। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि एआई का विस्तार क्रिएटिव इकोनॉमी को मजबूत करे, लेकिन इससे कॉपीराइट, रोजगार और संस्थागत भरोसे को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मानव रचनात्मकता की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।

एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के एक आधिकारिक कार्यक्रम में मोशन पिक्चर एसोसिएशन के चेयरमैन चार्ल्स रिवकिन के साथ बातचीत में वैष्णव ने कहा कि भारत टेक्नो-लीगल फ्रेमवर्क अपनाएगा। इसका मतलब है कि सिर्फ कानून नहीं, बल्कि तकनीकी सुरक्षा उपाय भी साथ-साथ लागू किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश बौद्धिक संपदा अधिकार यानी आपी राइट्स और कंटेंट क्रिएटर्स की वैल्यू को मानता है। इसलिए इनोवेशन और कॉपीराइट के बीच संतुलन जरूरी है।

कॉपीराइट के टकराव पर क्या बोले मंत्री?
मंत्री ने कहा कि एआई मॉडल बड़ी मात्रा में सार्वजनिक और कॉपीराइट सामग्री पर ट्रेन होते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या मौजूदा सिस्टम क्रिएटर्स को सही इनाम दे रहा है या नहीं। उन्होंने कहा कि नए गार्डरेल बनाने होंगे ताकि इनोवेशन भी बढ़े और आईपी की रक्षा भी हो। उनके मुताबिक साधारण नियम बना देने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए सहमति, नई तकनीक और संयुक्त व्यवस्था की जरूरत होगी।

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नियम नहीं, तकनीकी सुरक्षा भी क्यों जरूरी?
वैष्णव ने कहा कि पारंपरिक रेगुलेशन अकेले काफी नहीं होगा। एआई के लिए ऐसे सिस्टम चाहिए जिनमें कानूनी प्रावधान और तकनीकी कंट्रोल साथ काम करें। इससे लेखन, मालिकाना हक, भुगतान और जवाबदेही जैसे मुद्दों को बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा। उन्होंने कहा कि सरकार जिम्मेदार एआई लागू करने की दिशा में काम कर रही है ताकि जोखिम कम और फायदा ज्यादा हो।

सरकार का संतुलन प्लान क्या है?
मंत्री ने कहा कि एआई खेती, मौसम पूर्वानुमान, जलवायु मॉडलिंग, नई सामग्री खोज और उत्पादकता बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। लेकिन इसके साथ गलत इस्तेमाल का खतरा भी है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य यह है कि फायदे पूरे मिलें और नुकसान को सीमित रखा जाए। इस साल के समिट में एआई सुरक्षा से आगे बढ़कर उसके वास्तविक सामाजिक असर पर फोकस रखा गया है।

भारत की डिजिटल ताकत क्या है?
वैष्णव ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी डिजिटल रूप से सक्षम है और देश में व्यापक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी है। इसलिए नई तकनीक अपनाने की क्षमता मजबूत है। सरकार री-स्किल, अप-स्किल और न्यू-स्किल कार्यक्रमों पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वर्कफोर्स को नए कौशल दिए जाएंगे और भविष्य के लिए टैलेंट पाइपलाइन तैयार की जाएगी।

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क्रिएटिव सेक्टर के लिए कौन से लैब बन रहे हैं?
मंत्री ने भारतीय क्रिएटिव टेक्नोलॉजी संस्थान यानी आईआईसीटी की शुरुआत का जिक्र किया। यह उन्नत लैब के साथ क्रिएटिव इकोनॉमी को तकनीकी प्रशिक्षण देगा। इसका मुख्य कैंपस बनना शुरू हो चुका है। बजट में 15 हजार स्कूल और कॉलेज में कंटेंट क्रिएटर लैब खोलने की घोषणा भी की गई है। यहां छात्रों को आधुनिक डिजिटल प्रोडक्शन टूल मिलेंगे।

क्रिएट इन इंडिया मिशन से क्या बदलेगा?
वैष्णव ने कहा कि सरकार जल्द क्रिएट इन इंडिया मिशन शुरू करेगी। यह उद्योग, रोजगार और भविष्य पर केंद्रित मिशन होगा। इसका लक्ष्य है मौजूदा ताकत को मजबूत करना, भारत को दुनिया का पसंदीदा क्रिएशन प्लेटफॉर्म बनाना और 25 साल की जरूरत के हिसाब से टैलेंट तैयार करना। उन्होंने कहा कि क्रिएटिव इकोनॉमी और टेक्नोलॉजी साथ-साथ आगे बढ़ेंगी।

गलत सूचना पर कितनी सख्ती?
मंत्री ने चेतावनी दी कि डीपफेक, गलत सूचना और भ्रामक कंटेंट समाज के भरोसे पर हमला कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्थाओं, परिवार और सामाजिक ढांचे का आधार भरोसा है, जिसे एआई से बनी फर्जी सामग्री कमजोर कर सकती है। बच्चों की सुरक्षा को उन्होंने नॉन-नेगोशिएबल बताया। साथ ही वैश्विक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से कहा कि वे भारत के सांस्कृतिक और संवैधानिक मानकों का सम्मान करें। (अमर उजाला से साभार)

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