भिलाई 16 जून 25 ( mohan Media NEWS)आज का भारत एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। एक ओर वैश्विक मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और भूमिका में अभूतपूर्व वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर देश के सामने आंतरिक सामाजिक, वैचारिक और सांस्कृतिक चुनौतियाँ भी उतनी ही गंभीर हैं। विचारों का ध्रुवीकरण, सामाजिक विद्वेष, मूल्यहीनता, और राष्ट्रहित की प्राथमिकता से विचलित होती सोच – ये सब आधुनिक भारत के समक्ष गंभीर प्रश्न बनकर उभरे हैं।
इन्हीं प्रश्नों पर एक संतुलित, तथ्यपूर्ण और राष्ट्रहित-आधारित विमर्श के उद्देश्य से भारत विकास परिषद – दुर्ग इकाई यह व्याख्यान आयोजित किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि नवयुवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और नीति निर्माताओं के बीच एक सक्रिय संवाद की शुरुआत करना है, जो भारत के भविष्य की दिशा तय करने में सहायक हो सके
प्रखर राष्ट्रवादी चिंतक, लेखक एवं वक्ता पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ का कहना है कि यदि नेशन की विल पावर राजा के साथ खड़ी हो जाए, तो आप भी इजराइल बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपने अपनी ताकत दिखाई तो दुनिया को समझ आ गया कि आप कौन हो। उन्होंने कहा कि रोज-रोज उन सवालों को न उठाओ, जिसकी ठीक से जानकारी ही नहीं है। श्री कुलश्रेष्ठ भारत विकास परिषद दुर्ग इकाई द्वारा एक निजी होटल में आयोजित “वर्तमान भारत के समक्ष चुनौतियां एवं समाधान एक राष्ट्रवादी दृष्टिकोण’ विषय पर बोल रहे थे।
उन्होंने कहा इजराइल की आबादी मात्र 95 लाख है। पिछले 22 घंटे से ईरान पर इतना बारूद डाला है कि आने वाली नस्ल बारूद खाते पैदा होगी। पर किसी इजराइली ने नहीं पूछा कि युद्ध विराम कब होगी। यह नेशन की विल पावर को दिखाता है। उन्होंने बताया कि 1971 के युद्ध में 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किय किया था। जिसे दो माह तक खाना खिलाया और वापस भेज दिया। वर्तमान दौर में 9 मार्च 2022 को अंबाला में एक घटना हुई थी। आमतौर पर किसी दवाई का परीक्षण चूहों पर करते हैं। अंबाला से ब्रम्होस मिसाइल पाकिस्तान में जा गिरा था। बाद में सेना का स्पष्टीकरण आया कि धोखे से बटन दब गया।
इससे साबित हुआ कि भारत किसी के ऊपर पहले से हमला नहीं कर सकती। 70 साल से जो भ्रम फैलाया गया था, इस घटना ने उस भ्रम को तोड़ दिया।उन्होंने कहा कि राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना पहले होनी चाहिए। आप अपने होने का अहसास कराएं, अपनी शक्ति को पहचाने। एक राष्ट्रव्यापी दृष्टिकोण के तहत, हमें देश की एकता, अखंडता और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए। हमें अपनी संस्कृति, इतिहास और मूल्यों को संरक्षित और प्रोत्साहित करना चाहिए। हमें देश के विकास में सभी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए और उनकी जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए काम करना चाहिए। अपने वक्तव्य में इस राष्ट्र के युवाओं को धर्म कर्म और अपने नैतिक जिम्मेदारियां के प्रति सजग होना होगा अगर पिछली अर्थव्यवस्था को देखा जाए तो हमारे देश का समुचित विकास वैसा नहीं हो पाया जैसा होना चाहिए आज भी अगर देश में देखें तो कई हिस्से इससे अछूते रह गए हैं अगर देश का समुचित विकास करना है तो देश की सभी पहलुओं जैसे औद्योगिक व्यवसाय सामाजिक और धार्मिक जैसे सभी मुद्दों को ज्वलंत करते हुए उसे पर अपनी कार्यशैली को विस्तृत आयाम देना होगा केवल कागजों पर कार्य नहीं होना चाहिए कार्य का स्वरूप धरातल पर दिखना चाहिए सभी धर्म के प्रति अपने दृष्टिकोण को वास्तविक बनाएं जो धर्म जैसा है उसे उसी रूप में स्वीकार करें हमें किसी को भी ऊपर या नीचे नहीं करना है तभी इस देश का वास्तविक विकास संभव है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में मीडिया पार्टनर श्री दीपक एडवरटाइजर्स और होटल रोमन पार्क के संचालकों और अन्य प्रयोजन कताओ का विशेष सहयोग रहा जिसके लिए भारत विकास परिषद उनका धन्यवाद करता है। भारत विकास परिषद आने वाले समय में और भी बहुत से उल्लेखनीय एवं वैचारिक कार्य करने की अपेक्षा रखता है जिसमें जनमानस का सहयोग आवश्यक है भारत विकास परिषद द्वारा किए जाने वाले सभी कार्य देशहित एवं सामाजिक में होते हैं जिसे उनके कार्यकर्ताओं द्वारा सेवा भाव से संपन्न किया जाता है इस कार्यक्रम को सफल बनाने में परिषद के अध्यक्ष सुरेश कोठारी, सचिव तुलसी सोनी, कोषाध्यक्ष हर्ष जैन, डॉ अजय गोवर्धन डॉ सुरेश शर्मा डॉ अखिलेश नाशिनी श्री सुजीत ताम्रकार श्री संजय क कडे श्री आशीष शर्मा डॉ लक्ष्मी वर्मा श्रीमती कविता श्रीमती गीतांजलि डॉ अर्चना झा श्री मीनेश जैनऔर अन्य सदस्यों का संपूर्ण योगदान रहा इस अवसर पर पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय, महापौर अलका बाघमार, विधायक ललित चंद्राकर, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कामर्स के जिलाध्यक्ष अनूप गटागट, चेम्बर के प्रदेश मंत्री अशोक , श्री अजय भसीन डॉ. एस. के. शर्मा, डॉ ज्योति वर्मा सहित दुर्ग-भिलाई के नागरिकगण उपस्थित थे। संचालन प्रो. डॉ. ज्योति धारकर ने किया।

