
Act की धारा 138 के तहत मुकदमा चलाने के लिए “कानूनी रूप से प्रवर्तनीय ऋण” के रूप में योग्य नहीं हो सकता। हालांकि, न्यायालय ने सीवी राजन पर केरल हाईकोर्ट के निर्णय की सत्यता का पता लगाने के सीमित उद्देश्य से नोटिस जारी किया। अदालत ने कहा, “प्रथम दृष्टया, हमारा मानना है कि NI Act की धारा-138 में प्रयुक्त अभिव्यक्ति की पृष्ठभूमि में उक्त सिद्धांत लागू नहीं होगा। इसे “कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण” नहीं माना जाएगा। केरल हाईकोर्ट का यह दृष्टिकोण वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं हो सकता है। इसलिए इस सीमित उद्देश्य के लिए हम प्रतिवादी को छह सप्ताह में जवाब देने हेतु नोटिस जारी करने का आदेश देते हैं।”






