कुत्ते के मुंह में बच्चे का सिर: पटियाला पुलिस की जांच में सामने आया सच, इस मजबूरी में पिता ही बना गुनाहगार
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मंगलवार शाम राजिंदरा के वार्ड- चार की गैलरी में एक कुत्ता अपने मुंह में एक नवजात का सिर लेकर घूम रहा था। इस घटना से अस्पताल में हड़कंप मच गया था।

राजिंदरा अस्पताल पटियाला। – फोटो : सोशल मीडियाविज्ञापन
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पटियाला पुलिस ने सरकारी राजिंदरा अस्पताल में कुत्ते के मुंह में बच्चे का सिर मिलने का मामला सुलझाने का दावा किया है। पुलिस का दावा है कि बच्चे के पिता ने ही मृत पैदा हुए बच्चे को डस्टबिन में फेंका था। पुलिस ने थाना सिविल लाइन में धारा 94 बीएनएस के तहत केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक बच्चे के पिता गिरधारी लाल के पास उसके शव को दफनाने के पैसे नहीं थे। साथ ही वह अकेला था और पत्नी की देखभाल कर रहा था। इसके चलते उसने बच्चे के शव को पाॅलीथिन में डाल डस्टबिन में फेंक दिया। डस्टबीन को अस्पताल के कूड़े के ढेर में खाली कर दिया गया। वहां से आवारा कुत्तों ने शव को निकाल लिया था।
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एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि पुलिस ने मामले को तकनीकी ढंग से हल किया। उन्होंने बताया कि यह बच्चा मृत ही पैदा हुआ था। इस तरह के केस को इंट्रा यूटेराइन डेथ (आईयूडी) कहा जाता है।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक गिरधारी लाल व उसकी पत्नी तारा देवी 24 अगस्त को रात करीब साढ़े 8 बजे राजिंदरा अस्पताल आए थे। बाद में तारा देवी ने मृत बच्चे को जन्म दिया था। 25 अगस्त को कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद बच्चे का शव परिवार को सौंप दिया गया था। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक पुलिस ने मृत बच्चे की सेव करके रखी तस्वीरों को भी गिरधारी लाल के मोबाइल फोन से मिलाया है।
अनचाहे बच्चों के लिए पालने लगाए जाएंगे : स्वास्थ्य मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बुधवार को सरकारी राजिंदरा अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल में नवजाता का सिर मिलने की घटना की जानकारी ली। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कदम उठाने के निर्देश दिए।
डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि जन्म लेने वाले अनचाहे शिशुओं की देखभाल के लिए पालने लगाए जाएंगे। ऐसे शिशुओं के शवों को समेटने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे जो किसी कारणवश गर्भ में ही दम तोड़ जाते हैं और उनके अभिभावक अंतिम रस्में निभाने में असमर्थ हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे शिशुओं को कूड़े के ढेर पर न फेंकें, बल्कि उन्हें सरकारी अस्पताल या जिला प्रशासन को सौंप दें।
डॉ. बलबीर सिंह ने उपायुक्त डॉ. प्रीति यादव, नगर निगम आयुक्त परमवीर सिंह, एडीसी सिमरप्रीत कौर, मेडिकल कॉलेज के निदेशक प्राचार्य डॉ. आरपीएस सिबिया, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल चोपड़ा और एसपी सिटी पलविंदर सिंह चीमा व डॉ. अंकित नारंग के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी की। मंत्री ने निर्देश दिए कि ऐसी दुखद और अमानवीय घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएं। मंत्री ने कहा कि राजिंदरा में आवारा कुत्तों के घूमने की समस्या का भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार समाधान किया जा( अमर उजाला से साभार)


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