चेक बाउंस मामलों में हाईकोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को सुनाई तीन महीने की सजा

Spread the love
facebook icon
twitter icon
linkedin icon
tubmlr icon
pinterest icon

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को चेक बाउंस के सात मामलों में दोषी ठहराए जाने का . फैसला बरकरार रखते हुए प्रत्येक मामले में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने फैसले में राजपाल यादव को प्रत्येक मामले में 1.05 करोड़ रुपये का जुर्माना अदा करने का भी निर्देश दिया। इसमें से 1 करोड़ 4 लाख 75 हजार रुपये शिकायतकर्ता को और 25 हजार रुपये राज्य को दिए जाएंगअदालत राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी प्रत्येक मामले में 5 लाख 51 हजार 380 रुपये शिकायतकर्ता को अदा करने का निर्देश दिया।

इसके अलावा, श्री नवरंग गोदावरी एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड का नाम कंपनी रजिस्ट्रार के अभिलेख से पहले ही हटाया जा चुका है। ऐसे में सत्र न्यायालय के आदेश के अनुसार कंपनी को केवल चेतावनी देकर छोड़ने के आदेश को भी हाईकोर्ट ने बरकरार रखा।

हाईकोर्ट ने कहा कि सेशन कोर्ट ने शिकायतकर्ता को पहले से किए गए भुगतान को ध्यान में रखते हुए ही जुर्माने की राशि तय की थी और उसमें कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

अदालत ने यह भी कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को पहले ही 2.25 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अंतिम देय राशि की गणना करते समय इस रकम का समायोजन किया जाएगा।

फैसले में अदालत ने कहा कि पहले की सुनवाई के दौरान एक पीठ इस मामले को गुण-दोष के आधार पर सुनने के पक्ष में नहीं थी। हालांकि, राजपाल यादव ने विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की इच्छा जताई, इसलिए उन्हें राहत दी गई और कई अवसर दिए गए।

हाईकोर्ट ने कहा कि बार-बार अवसर दिए जाने और अदालत के समक्ष दिए गए आश्वासनों के बावजूद राजपाल यादव ने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। अंत में उन्होंने शिकायतकर्ता को कोई और भुगतान करने से इनकार कर दिया और यहां तक कहा कि वह जेल जाने के लिए तैयार हैं।

अदालत ने टिप्पणी की,

“यदि कोई पक्षकार अदालत में दिए गए अनेक आश्वासनों का पालन करने के बजाय जेल जाना चुनता है तो यह उसका अपना निर्णय है। कानून कोई पटकथा नहीं है, जिसे किसी अभिनेता की इच्छा के अनुसार बदला जा सके। अदालतें सभी के लिए समान रूप से कानून लागू करती हैं और वर्तमान पक्षकार भी इसका अपवाद नहीं हो सकता।”

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि राजपाल यादव का आचरण ऐसा नहीं है कि उन्हें परिवीक्षा पर रिहाई का विवेकाधीन लाभ दिया जाए।

हालांकि, अदालत ने राजपाल यादव को इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने के लिए दो महीने का समय दिया।

Tags:    

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *