मिलाई इस्पात संयंत्र से सेवा निवृत कर्मचारियों द्वारा न्यू प्रेस क्लब आफ भिलाईनगर सेएप्रेस वार्ता के दौरान सेल प्रबंधन से आग्रह किया है किहाउस रिटेंशन स्कीम के अंतर्गत निवासरत सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध जारी की जा रही सभी दसनामक एवं बेदखली संबंधी कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने से पूर्व बीएसपी आवास पर अनधिकृत रूप से अथवा अनधिकृत अवधि तक कब्जा किए हुए सभी पूरीय पक्ष आवंटिती के विरुद्ध सम्मान रूप से विधिसम्मत कार्यवाही की जाए।
- कार्यालय आदेश दिनांक 17.11.2825 मारा हाउस निर्देशन स्कीम के अंतर्गत सेवानिवृत कर्मचारियों पर लगाए गए संशोधित मकान किराये की पुनः समीक्षा एवं पुनर्विचार कराया जाए तथा उसमें की गई अत्यधिक एवं असं वृद्धिको कालिया जाए। वैकल्पिक रूप से कोइरीश आवंटितों पर लागू दरी के समकक्षों लाया जाए, ताकि सभी श्रेणियों के आवासधारकों के साथ समानता एवंभावरहित व्यवहार सुनिश्चित हो सके।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक मानवीय, पारदर्शी एवं न्यायसंगत आवास नियमितीकरण नौति (House Regularisation Policy) बनाई जाए। विशेष रूप से इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाए कि अनेक सेवानिवृत कर्मचारी केवल इस आशा में वर्षों से बीएसपी आवासों में निवास कर रहे हैं कि सैल निदेशक मंडल की 21 एवं 25 जुलाई 2008 को आयोजित 340वीं बैठक में स्वीकृत हाउस लीजिंग स्कीम भविष्य में सागू की जाएगी।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के निम्नलिखित रोके गए एवं बकाया वैध देयी का भुगतान तत्काल किया जाए-
सेल पेंशन योजना के अंतर्गत देय पेंशन का बकाया (Pension Arrears)
पर्स (Parks) का बकाया भुगतान।
साथ ही. उक्त समस्त देयों पर उनकी वास्तविक देय तिथि से भुगतान की तिथि तक 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध मकान किराये की मांग निर्धारित करते समय सक्षम एस्टेट न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का पूर्ण सम्मान एवं पालन करें तथा उन्हीं के अनुरूप संशोधित मांग-पत्र (House Rent Bills) जारी करें।
- अब समाचार-पत्रों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि सरकार की मुद्रीकरण (Monetisation) नौति के अनुरूप भिलाई इस्पात संयंत्र के स्वामित्व में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि को शासन अथवा शासन द्वारा नामित किसी एजेंसी को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया जा रहा है। यह भी जात हुआ है कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत मिलाई टाउनशिप के आवासीय क्षेत्री को भी शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।
इससे प्रतीत होता है कि प्रबंधन द्वारा इस विषय में न तो कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को सही जानकारी दी जा रही है और न ही जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया है। यदि जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, तो यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, और यदि जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसे कर्मचारियों एवं नागरिकों से छिपाया जा रहा है, तो यह भी अत्यंत आपत्तिजनक है।
इस संबंध में हमारी स्पष्ट मांग है कि कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के निवासरत मकानों को ध्वस्त कर भूमि को बंजर बनाकर शासन अथवा किसी अन्य एजेंसी को हस्तांतरित करने के स्थान पर, उन मकानों को उनकी वर्तमान स्थिति में, उनसे संबद्ध भूमि सहित, वर्षों से उनमें निवास कर रहे कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित उचित मूल्य पर स्वामित्व के आधार पर प्रदान किया जाए।
मिलाई इस्पात संयंत्र के ये पूर्व कर्मचारी वे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की सेवा में समर्पित किया तथा देश के इस्पात उद्योग के विकास एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज वे अपने जीवन की संध्या बेला में सम्मान, सुरक्षा एवं न्यायपूर्ण व्यवहार के अधिकारी है। अतः उनके साथ कठोर एवं भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने के स्थान पर उन्हें सहानुभूतिपूर्ण न्यायोचित एवं समानतापूर्ण व्यवहार प्रदान किया आना न केवल मानवीय दृष्टि से, बल्कि प्रशासनिक एवं संवैधानिक मूल्यों की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है।
दिया है तथा दिसंबर 2025 से बढ़ाए गए मकान किराए का भुगतान न करने का आह्वान किया है।
अतः हम मिलाई इस्पात संयंत्र सेल प्रबंधन से आग्रह करते हैं कि
- हाउस रिटेंशन स्कीम के अंतर्गत निवासरत सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध जारी की जा रही सभी दसनामक एवं बेदखली संबंधी कार्यवाहियों पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि उनके विरुद्ध कोई भी दंडात्मक कार्यवाही प्रारंभ करने से पूर्व बीएसपी आवास पर अनधिकृत रूप से अथवा अनधिकृत अवधि तक कब्जा किए हुए सभी पूरीय पक्ष आवंटिती के विरुद्ध सम्मान रूप से विधिसम्मत कार्यवाही की जाए।
- कार्यालय आदेश दिनांक 17.11.2825 मारा हाउस निर्देशन स्कीम के अंतर्गत सेवानिवृत कर्मचारियों पर लगाए गए संशोधित मकान किराये की पुनः समीक्षा एवं पुनर्विचार कराया जाए तथा उसमें की गई अत्यधिक एवं असं वृद्धिको कालिया जाए। वैकल्पिक रूप से कोइरीश आवंटितों पर लागू दरी के समकक्ष लाया जाए, ताकि सभी श्रेणियों के आवासधारकों के साथ समानता एवंभावरहित व्यवहार सुनिश्चित हो सके।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सामाजिक एवं आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए एक मानवीय, पारदर्शी एवं न्यायसंगत आवास नियमितीकरण नौति (House Regularisation Policy) बनाई जाए। विशेष रूप से इस तथ्य को भी ध्यान में रखा जाए कि अनेक सेवानिवृत कर्मचारी केवल इस आशा में वर्षों से बीएसपी आवासों में निवास कर रहे हैं कि सैल निदेशक मंडल की 21 एवं 25 जुलाई 2008 को आयोजित 340वीं बैठक में स्वीकृत हाउस लीजिंग स्कीम भविष्य में सागू की जाएगी।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के निम्नलिखित रोके गए एवं बकाया वैध देयी का भुगतान तत्काल किया जाए-
सेल पेंशन योजना के अंतर्गत देय पेंशन का बकाया (Pension Arrears)
पर्स (Parks) का बकाया भुगतान।
साथ ही. उक्त समस्त देयों पर उनकी वास्तविक देय तिथि से भुगतान की तिथि तक 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों के विरुद्ध मकान किराये की मांग निर्धारित करते समय सक्षम एस्टेट न्यायालयों द्वारा पारित आदेशों का पूर्ण सम्मान एवं पालन करें तथा उन्हीं के अनुरूप संशोधित मांग-पत्र (House Rent Bills) जारी करें।
- अब समाचार-पत्रों के माध्यम से यह जानकारी प्राप्त हुई है कि सरकार की मुद्रीकरण (Monetisation) नौति के अनुरूप भिलाई इस्पात संयंत्र के स्वामित्व में उपलब्ध अनुपयोगी भूमि को शासन अथवा शासन द्वारा नामित किसी एजेंसी को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया जा रहा है। यह भी जात हुआ है कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत मिलाई टाउनशिप के आवासीय क्षेत्री को भी शामिल किए जाने का प्रस्ताव है।
इससे प्रतीत होता है कि प्रबंधन द्वारा इस विषय में न तो कर्मचारियों एवं आम नागरिकों को सही जानकारी दी जा रही है और न ही जनप्रतिनिधियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया गया है। यदि जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, तो यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है, और यदि जानकारी उपलब्ध होने के बावजूद उसे कर्मचारियों एवं नागरिकों से छिपाया जा रहा है, तो यह भी अत्यंत आपत्तिजनक है।
इस संबंध में हमारी स्पष्ट मांग है कि कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के निवासरत मकानों को ध्वस्त कर भूमि को बंजर बनाकर शासन अथवा किसी अन्य एजेंसी को हस्तांतरित करने के स्थान पर, उन मकानों को उनकी वर्तमान स्थिति में, उनसे संबद्ध भूमि सहित, वर्षों से उनमें निवास कर रहे कर्मचारियों एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों को शासन द्वारा निर्धारित उचित मूल्य पर स्वामित्व के आधार पर प्रदान किया जाए।
मिलाई इस्पात संयंत्र के ये पूर्व कर्मचारी वे लोग हैं जिन्होंने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड की सेवा में समर्पित किया तथा देश के इस्पात उद्योग के विकास एवं राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। आज वे अपने जीवन की संध्या बेला में सम्मान, सुरक्षा एवं न्यायपूर्ण व्यवहार के अधिकारी है। अतः उनके साथ कठोर एवं भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने के स्थान पर उन्हें सहानुभूतिपूर्ण न्यायोचित एवं समानतापूर्ण व्यवहार प्रदान किया आना न केवल मानवीय दृष्टि से, बल्कि प्रशासनिक एवं संवैधानिक मूल्यों की दृष्टि से भी अत्यंत आवश्यक है।
