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Σ प्रदेश में खनन व मशीनरी उद्योग का विकास जरूरी, युवाओं को मिले कौशल
आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ है भारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु उद्योग
रायपुर : 18 अगस्त 2026 [pmohan] अग्रवाल मंगलवार को दिल्ली में संसद की प्राक्कलन समिति की बैठक में सम्मिलित हुए। बैठक का मुख्य विषय देश में भारी उपकरण उत्पादन क्षमता की समीक्षा था, जिसमें भारी उद्योग मंत्रालय और पूंजीगत वस्तु क्षेत्र के विकास व रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया के विजन को साकार करने मेंभारी इंजीनियरिंग और पूंजीगत वस्तु उद्योग की भूमिका रीढ़ की हड्डी समान है। देश की जीडीपी में लगभग 1.9 प्रतिशत का प्रत्यक्ष योगदान देने वाला यह क्षेत्र अन्य सभी विनिर्माण उद्योगों को आवश्यक मशीनरी उपलब्ध कराकर औद्योगिक क्रांति को गति दे रहा हैअग्रवाल ने समिति को बताया कि पिछले चार वर्षों में केंद्र सरकार की नीतियों से भारी उपकरण क्षेत्र में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है। अर्थमूविंग, निर्माण एवं खनन मशीनरी क्षेत्र का उत्पादन 178.3 प्रतिशत बढ़कर 80,750 करोड़ रुपए तक पहुंचा है, जबकि निर्यात में 274.4 प्रतिशत की अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। मशीन टूल्स एवं डाई-मोल्ड उद्योग का उत्पादन 116.4 प्रतिशत बढ़कर 14,286 करोड़ रुपए हो गया है।
