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भिलाई । I 2 अप्रेल 2026 । भाजपा नेता राजेंद्र अरोरा ने आज पत्रकार वार्ता में एमएमएस प्रकरण को लेकर तीखा हमला बोलते हुए पूरे प्रकरण को संदेहास्पद बताया और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि विधायक इस मुद्दे पर केवल घड़ियाली आंसू बहा रहे है जबकि यदि उन्हें जाँच एजेंसियों पर भरोसा होता ती वे समय पर पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज कराते और अपनी कथित जांच रिपोर्ट भी प्रस्तुत करते।
राजेंड अरोरा का आरोप है कि पुलिस द्वारा लगातार आठ बार नोटिस दिए जाने के बावजूद विधायका का बयान के लिए उपस्थित न होना कई सवाल खड़े करता है जबकि वे नौवे नोटिस पर जाकर बयान देने पहुंचे। उन्होंने इसे जांच प्रक्रिया के पति गंभीरता की कमी बताया। साथ ही उन्होंने यह भी प्रश्नन उठाया कि जिस जांच रिपोर्ट के आधार पर विधायक ने एमएमएस को फर्जी बतायाए वह जांच आखिर कहां और किस एजेंसी से कराई गई तथा उसकी प्रमाणिकता क्या है।
प्रेस वार्ता . । । के दौरान राजेंद्र अरोरा ने आरोप लगाया कि पूरे घटनाक्रम में एक सुनियोजित रणनीति नजर आती है जिसमें पहले स्वयं एक कहानी गढ़ी गई फिर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया गया और बाद में राजनीतिक विरोधियों पर आरोप मंढ़े गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी में भी विधायक पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगाया था इसके बावजूद इसे अनावश्यक रूप से बड़ा मुद्दा बनाया गया।
उन्होंने भिलाई की जनता का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोग बेहद समझदार है और इस पवार की राजनीतिक गतिविधियों को अच्छी तरह समझते हैं। राजेंद्र अरोरा ने यह भी आरोप लगाया कि विधायक का शहर की, जनता से सीधा जुड़ाव पिछले कुछ वर्षों में कम हुआ है और वे स्थानीय मुद्दों से दूर रहे है।
इसी क्रम में राजेंद्र अरोरा ने कहा कि यह वीडियो सीडी चुनाव के लगभग तीन महीने पहले ही बाजार में घूम रही थी उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और स्वयं देवेंद्र यादव विधायक थे। यदि उन्हें इस पर संदेह था तो उन्होंने उसी समय अपनी ही सरकार में रहते हुए जांच क्यों नहीं करवाई उन्होंने सवाल उठाया कि विधायक स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि उन्होंने यह वीडियो देखी थी तो यह वीडियो उन्हें किसने दिखाई और उन्हें यह जानकारी कैसे मिली कि यह भिलाई में प्रसारित हो रही है।
अरोरा ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान स्वयं देवेंद्र यादव ने प्रेस वार्ता कर इस वीडियो की जानकारी भिलाई के लोगों तक पहुंचाई। जिन लोगों को इस विषय की जानकारी नहीं थी उनके बीच भी यह मुद्दा इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया के माध्यम से फैलाया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद विधायक ने सार्वजनिक रूप से भोंवुकता दिखाते हुए सहानुभूति बटोरने का प्रयास किया और प्रेस वार्ता में एक कथित जांच रिपोर्ट लहराते हुए दावा किया कि उन्होंने वीडियो की जांच करवाई है जिसमें उन्हें क्लीन चिट *मिल चुकी है और उनकी छवि धूमिल करने की साजिश की जा रही है। जिसे राजेद्र अरोरा ने इसे झूठा करार दिया ।
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