बफर मौजूद, 110 डॉलर प्रति बैरल तक कच्चे तेल की कीमतों को वहन करने में सक्षम

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सार

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर फिलहाल असर नहीं पड़ने वाला। इस मामले में जारी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार पेट्रोल पर 19.9 रुपए और डीजल पर 15.8 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी कम करके ईंधन की कीमतों को लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक स्थिर रख सकती है। 

India Possesses Sufficient Tax Buffer Capable of Withstanding Crude Oil Prices Up to $110 Per Barrel

सांकेतिक तस्वीर – फोटो : अमर उजालाविज्ञापन

विस्तार

भारत के पास बढ़ी हुई कच्चे तेल की कीमतों को वहन करने के लिए पर्याप्त टैक्स बफर मौजूद है और सरकार पेट्रोल पर 19.9 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.8 रुपए प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी को कम करके करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक खुदरा ईंधन की कीमतों को यथावत रख सकती है। यह जानकारी सोमवार को जारी की गई रिपोर्ट में दी गई।  एलारा कैपिटल की रिपोर्ट में कहा गया है कि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों को एक्साइज ड्यूटी में कटौती के जरिए लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल तक पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है, जिसके बाद डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी अनिवार्य हो जाएगी।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत कच्चे तेल की कीमतों में 40-45 डॉलर की बढ़ोतरी को कर के जरिए सहन कर सकता है, लेकिन 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर यह बोझ सरकार से उपभोक्ताओं पर आ जाएगा। कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि होने पर, तेल विपणन कंपनियों के डीजल और गैसोलीन मार्जिन में 6.3 रुपए प्रति लीटर की गिरावट आएगी और एलपीजी की कीमत में 10.2 रुपए प्रति किलोग्राम की वृद्धि होगी।
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रिपोर्ट में और क्या-क्या?
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस स्थिति के कारण एलपीजी अंडर रिकवरी वार्षिक आधार पर लगभग 328 अरब रुपए पहुंच जाएगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि होने पर तेल विपणन कंपनियों का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन लगभग 5 डॉलर प्रति बैरल बढ़ सकता है, लेकिन इससे उनके विपणन और एलपीजी संबंधी नुकसान की पूरी तरह भरपाई नहीं हो पाएगी।

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आय में आ सकती है भारी कमी, कैसे?
रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि मौजूदा ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल होने पर, खुदरा कीमतों में वृद्धि, कर कटौती या एलपीजी सब्सिडी में बढ़ोतरी के अभाव में, आय में 90-190 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है। उच्च रिफाइनिंग हिस्सेदारी के कारण आईओसीएल, ओएमसी कंपनियों में बेहतर स्थिति में है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और खुदरा कीमतों में कोई बदलाव न होने की स्थिति में यह अभी भी जोखिम में है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत के एलएनजी आयात का दो-तिहाई हिस्सा होर्मुज मार्ग से होकर गुजरता है, जिससे गैस आपूर्ति में जोखिम बढ़ जाता है। ( अमर उजाला से . साभार )

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