रायपुर : स्मार्ट टीवी, नई वर्णमाला से मिल रही रोचक और ज्ञानवर्धक शिक्षा

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स्मार्ट टीवी

शिक्षक दंम्पत्ति को आदिवासी अंचलों के स्कूलों में नवाचार के लिए कलेक्टर ने किया सम्मानित

शिक्षक दंपत्ति ने धमतरी जिले के 157 स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए की स्मार्ट टीवी की व्यवस्था

बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी रोचक ढंग से सिखाने नदियों पर आधारित वर्णमाला

रायपुर, 20 मई 2025 (Mohan media News)

आदिवासी अंचलों में पढ़ने वाले स्कूली बच्चे अब गणित, विज्ञान सहित हिंदी और अंग्रेजी की पढ़ाई स्मार्ट टीवी और नदियों पर आधारित वर्णमाला के जरिए कर रहे हैं। धमतरी जिले के सूदुर अंचलों में 157 स्कूलों में स्मार्ट टीवी के जरिए अध्यापन किया जा रहा है। इससे एक ओर बच्चों में सीखने की क्षमता विकसित हो रही है वहीं दूसरी ओर इन बच्चों को पढ़ाई के लिए उत्कृष्ट वातावरण मिल रहा है।

आदिवासी अंचलों के इन बच्चों को वर्णमाला और भूगोल की रूचिपूर्ण शिक्षा दी जा रही है। इसके लिए 5 देशों की 111 नदियों के नाम पर बच्चों के लिए विशेष वर्णमाला भी तैयार की गई है। बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के लिए पौधरोपण, जल संरक्षण कार्यों से भी जोड़ा जा रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव लाने की पहल मगरलोड के शासकीय प्राथमिक शाला लुगे में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती रंजीता साहू और उनके पति श्री तुमनचंद साहू द्वारा शुरू की गई है।

कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने शिक्षक दंपत्ति इस पहल की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित भी किया गया है। उन्होंने इस पहल पर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। उन्होंने कहा कि साहू दंपत्ति ने सीमित संसाधनों में बच्चों के लिए शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने का जो कार्य किया है, वह अत्यंत सराहनीय है।

नदियों पर आधारित वर्णमाला अभी तक लगभग 11 हजार विद्यार्थियों को वितरित की जा चुकी है। समाजिक सहभागिता और 50 प्रतिशत की राशि के सहयोग से अब तक 111 स्कूलों में स्मार्ट टीवी लगाए जा चुके हैं। साथ ही स्कूली बच्चों को शारीरिक, मानसिक और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने का भी प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षक दंपत्ति ने स्कूलों में पौधरोपण अभियान भी शुरू किया है। लगभग 1100 पौधे और तीन हजार से अधिक हर्बल पौधे लगाए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने स्मार्ट गणित, इंग्लिश और हिंदी वर्णमाला पर आधारित प्रेजेंटेशन भी स्कूलों को उपलब्ध कराए हैं। धमतरी जिले में इस नवाचार ने शिक्षा व्यवस्था में एक नई ऊर्जा भर दी है और यह पहल अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है।

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