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Supreme Court: बिहार मतदाता सूची पुनरीक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, 10 जुलाई को याचिकाओं पर होगी सुनवाई

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 07 Jul 2025 10:50 AM IST

सार

चुनाव आयोग ने 24 जून को बिहार में मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण करने के निर्देश जारी किए थे। इसके खिलाफ सांसद मनोज झा समेत कई नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करने पर सहमति जता दी है। 

Supreme Court agrees to hear pleas challenging special intensive revision of electoral rolls in Bihar

सुप्रीम कोर्ट – फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने बिहार में आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 10 जुलाई की तारीख तय की है। कोर्ट ने इस मामले में दायर याचिकाओं को स्वीकार करते हुए कहा कि वह निर्वाचन आयोग के इस कदम की वैधता पर निर्धारित तिथि को विचार करेगा।

न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की आंशिक कार्य दिवस (पीडब्ल्यूडी) पीठ  ने वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल के नेतृत्व में कई याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत दलीलों को संज्ञान में लेते हुए गुरुवार (10 जुलाई) को मामले की सुनवाई के लिए सहमति जताई। सिब्बल ने पीठ से आग्रह किया कि वह इन याचिकाओं पर चुनाव आयोग को नोटिस जारी करे। इस पर न्यायमूर्ति धूलिया ने कहा, हम इस मामले को गुरुवार को सुनेंगे।

Supreme Court agrees to hear on July 10 a batch of pleas challenging the Election Commission of India’s move to conduct a Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in poll-bound Bihar. pic.twitter.com/VQal2fa8X2


मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में राजद सांसद मनोज झा, एडीआर और टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने याचिका दायर की है। मनोज झा ने चुनाव आयोग के उस निर्णय को अदालत में खारिज करने की मांग की है, जिसमें आयोग ने बिहार में विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तुरंत लागू करने का निर्देश दिया है। राजद का कहना है कि विधानसभा चुनाव के ठीक कुछ महीने पहले इस तरह की प्रक्रिया चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है।

मनोज झा ने कहा कि निर्वाचन आयोग का 24 जून का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 325 (जाति, धर्म और लिंग के आधार पर किसी को भी मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जा सकता) और अनुच्छेद 326 (18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका प्रत्येक भारतीय नागरिक मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के योग्य है) का उल्लंघन करता है, इसलिए इसे रद्द किया जाना चाहिए।

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वहीं महुआ मोइत्रा ने अपनी याचिका में कहा कि वह निर्वाचन आयोग के 24 जून के उस आदेश को रद्द करने का अनुरोध करती हैं, जिसके तहत संविधान के विभिन्न प्रावधानों का कथित उल्लंघन करते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) किया जा रहा है।

महुआ ने अपनी याचिका में कहा, अगर इस आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो यह देश में बड़े पैमाने पर पात्र मतदाताओं को मताधिकार से वंचित कर सकता है, जिससे लोकतंत्र, स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव कमजोर हो सकते हैं। महुआ ने शीर्ष अदालत से भारत निर्वाचन आयोग को देश के अन्य राज्यों में मतदाता सूचियों की विशेष गहन पुनरीक्षण के इस तरह के आदेश जारी करने से रोकने का निर्देश देने का अनुरोध किया।

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